क्यों ज़रूरी है नई शुरुआत?

भूमिका : 

जीवन में हर कोई कभी न कभी ऐसी स्थिति में पहुँचता है, जहाँ ऐसा लगता है कि अब आगे कुछ नहीं बचा। कभी थकान आ जाती है, कभी हालात बिगड़ जाते हैं, कभी रास्ते बंद हो जाते हैं और कभी मन टूट सा जाता है। ऐसे समयों में मनुष्य सोचता है कि अब कुछ नया नहीं हो सकता। जीवन यहीं ठहर गया है। लेकिन यही वो समय है जब परमेश्वर अपने बच्चों की ओर दया की नजर से देखता है और उनके लिए एक नई शुरुआत का द्वार खोल देता है। बाइबल हमें बार-बार यह विश्वास दिलाती है कि परमेश्वर नए आरंभ का परमेश्वर है। वह मनुष्य के जीवन को न सिर्फ बदलता है, बल्कि उसे नई दिशा भी देता है।

परमेश्वर का स्वभाव ही नया आरंभ देने वाला है

दुनिया बदलती रहती है। लोग बदल जाते हैं। परिस्थितियाँ भी कभी अच्छी तो कभी कठिन हो जाती हैं। पर एकमात्र परमेश्वर है जो कभी नहीं बदलता और न ही कभी थकता है। जब मनुष्य थक जाता है और टूट जाता है, जब वह निराश होकर बैठ जाता है, तब भी परमेश्वर उसे नहीं छोड़ता। जीवन में अंधकार चाहे कितना भी बढ़ जाए, उम्मीद चाहे कितनी भी कम हो जाए, परंतु परमेश्वर हमेशा अपने बच्चों के लिए नई राह बनाने में सामर्थी है।

जब जीवन के रास्ते बंद नजर आते हैं, तब परमेश्वर अपने समय पर नया दरवाज़ा खोल देता है। सृष्टि से लेकर आज तक, हर बार जब भी मानव इतिहास ने नई दिशा पकड़ी है, उसका स्रोत परमेश्वर ही रहा है। चाहे वह सृष्टि की शुरुआत हो, चाहे नूह के समय का नया अध्याय हो, चाहे इस्राएलियों का मिस्र से निकलना हो, या फिर यीशु मसीह का संसार में आगमन—हर नयी शुरुआत परमेश्वर की योजना का हिस्सा रही है।

मनुष्‍य के भीतर परिवर्तन की आवश्यकता

दुनिया की किताबें और विचार मनुष्य को नई शुरुआत के लिए तैयार तो करती हैं, परंतु वे केवल बाहरी बदलावों पर ध्यान देती हैं। बाइबल एक अलग बात कहती है। वह यह सिखाती है कि जब तक मनुष्य का हृदय नहीं बदलता, तब तक कोई भी शुरुआत स्थायी और सच्ची नहीं हो सकती। परमेश्वर केवल बाहरी हालात नहीं बदलता। वह मनुष्य के भीतर काम करता है।

पुराने नियम से लेकर नए नियम तक हम देखते हैं कि जब भी लोग टूटे, निराश हुए, गिर गए या रास्ता भटक गए, तब परमेश्वर ने उन्हें उठाया, संभाला और एक नई राह दिखाई। नई शुरुआत हमेशा भीतर से शुरू होती है। जब किसी का दिल बदलता है, तब उसके विचार बदलते हैं। विचार बदलते हैं, तो उसके फैसले बदलते हैं। फैसले बदलते हैं, तो जीवन की दिशा बदल जाती है। यही परिवर्तन परमेश्वर करता है।

नए आरंभ के पीछे परमेश्वर का उद्देश्य

परमेश्वर मनुष्य को केवल एक नया मौका नहीं देता कि वह फिर से वही गलतियाँ दोहराए। वह नई दृष्टि देता है, ताकि इंसान अपने जीवन को उसकी दृष्टि से देख सके। जब हम परमेश्वर की नज़रों से अपने जीवन को देखने लगते हैं तो हर परिस्थिति का अर्थ अलग नजर आने लगता है। कठिनाइयाँ भी फिर बाधा नहीं बल्कि सीख लगने लगती हैं।

परमेश्वर नया साहस भी देता है। जब मनुष्य टूट जाता है या डर जाता है, तब परमेश्वर अपनी आत्मा के द्वारा उसे नई शक्ति देता है। यह साहस इंसान को उस स्थिति से बाहर निकालता है जहाँ वह खुद को असमर्थ समझ रहा होता है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि परमेश्वर नया उद्देश्य देता है। उद्देश्य जीवन का इंजन है। बिना उद्देश्य के इंसान दिशा हीन हो जाता है, उसकी चाल धीमी पड़ जाती है, और वह उलझनों में फँस जाता है। परंतु जब परमेश्वर उद्देश्य देता है, तब जीवन में नई ऊर्जा, नया जोश और आगे बढ़ने की नई शक्ति आ जाती है।

अंधकार के बीच नई सुबह की आहट

हर किसी के जीवन में ऐसे समय आते हैं जब सबकुछ अंधकार से घिरा हुआ नजर आता है। कई बार हम आर्थिक चुनौतियों से जूझते हैं, कभी पारिवारिक समस्याएँ परेशान करती हैं, कभी स्वास्थ्य बिगड़ जाता है और कभी विश्वास कमजोर पड़ जाता है। ऐसे समय में लगता है कि अब कोई आशा नहीं बची।

लेकिन बाइबल बताती है कि रोना रात भर रहता है, पर भोर होते ही आनन्द आता है। इसका अर्थ यह है कि अंधकार स्थायी नहीं होता। परमेश्वर अंधकार के बीच भी अपने बच्चों के लिए नई आशा की किरण तैयार रखता है। जहाँ हमारी शक्ति समाप्त होती है, वहीं से उसकी सामर्थ्य कार्य करना शुरू करती है।

जीवन में कई बार मनुष्य कह देता है कि अब कुछ नहीं हो सकता। परंतु परमेश्वर वही क्षण चुनता है और कहता है—“अब मैं कुछ नया करने जा रहा हूँ।” यही कारण है कि परमेश्वर हमेशा सही समय पर हस्तक्षेप करता है और जीवन को नई दिशा देता है।

दुनियावी किताबें और परमेश्वर के वचन की तुलना

आज की दुनिया में बहुत सारी किताबें नई शुरुआत के विषय पर लिखी गई हैं। मोटिवेशनल स्पीच, सेमिनार और वर्कशॉप लोगों को प्रेरित करते हैं कि वे बदलें, आगे बढ़ें और नया जीवन अपनाएँ। ये बातें अच्छी हैं और कई बार मनुष्य को प्रेरणा भी देती हैं।

लेकिन इनका आधार मनुष्य की अपनी शक्ति पर होता है—”तुम कर सकते हो, तुम बदल सकते हो, तुम आगे बढ़ सकते हो।” दूसरी ओर, परमेश्वर का वचन कहता है—”मैं तुम्हें नया बनाऊँगा।” यही सबसे बड़ा अंतर है।

दुनिया मनुष्य को उसके अतीत से भागने को कहती है, जबकि परमेश्वर अतीत से सीखने को कहता है। दुनिया कहती है आदतें बदलो, परमेश्वर कहता है हृदय बदलो। दुनिया कहती है कोशिश करो, परमेश्वर कहता है भरोसा करो। यही वजह है कि परमेश्वर द्वारा दिया गया नया आरंभ स्थायी होता है।

त्योहारों, नए साल और ऋतुओं में नए आरंभ का संदेश

हर वर्ष जब नया साल आता है, तो दुनिया भर में लोग उम्मीद और खुशी के साथ उसका स्वागत करते हैं। वे मानते हैं कि नया साल नई संभावनाएँ लेकर आता है। परंतु नया साल केवल एक तारीख का बदलना नहीं है। यह हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर की दया हर सुबह नई होती है।

क्रिसमस भी नई शुरुआत का एक अद्भुत संदेश देता है। यीशु मसीह का जन्म केवल एक बालक के रूप में नहीं हुआ, बल्कि वह एक नई रोशनी, नई आशा और नया मोड़ लेकर आया। स्वर्ग ने पृथ्वी से कहा—”नए आरंभ का समय आ गया है।”

ऋतुओं का बदलना भी बताता है कि जीवन स्थिर नहीं है। जिस तरह सर्दी के बाद बसंत आता है, उसी तरह कठिनाइयों के बाद नई आशा आती है। इन सब चीज़ों के माध्यम से परमेश्वर हमें दिखाता है कि वह हमेशा कुछ नया कर रहा है।

नई शुरुआत कैसे प्राप्त करें?

नई शुरुआत के लिए पहला कदम है—स्वीकार करना कि हम अपनी शक्ति से सबकुछ नहीं कर सकते। यह कमजोरी नहीं, बल्कि परमेश्वर के सामने नम्रता है। जब दिल खुलता है, तब परमेश्वर का कार्य शुरू होता है।

दूसरा कदम है—पश्चाताप। सच्चा पछतावा वह है जिसमें इंसान अपने पूर्व के गलतियों को मानता है और उन्हें छोड़ने का निर्णय लेता है। ऐसे व्यक्ति को परमेश्वर क्षमा करता है और उसे नया बनाता है।

तीसरा कदम है—विश्वास। विश्वास वह चाबी है जो परमेश्वर के नए द्वार को खोलती है। जब हम विश्वास करते हैं कि वह हमें बदल सकता है, तभी परिवर्तन संभव होता है।

चौथा कदम है—आज्ञाकारिता। परमेश्वर के वचन का पालन करने से नई शुरुआत स्थायी होती है। आज्ञा पालन ही जीवन में स्थिरता लाता है।

परमेश्वर का अद्भुत वचन : “मैं सब कुछ नया कर देता हूँ”

प्रकाशितवाक्य 21:5 का यह वचन केवल भविष्य का वादा नहीं है, बल्कि वर्तमान में भी सत्य है। परमेश्वर आज भी लोगों के टूटे हुए जीवनों को नया कर रहा है। वह राख में से सुंदरता निकाल सकता है। वह असफलता को गवाही में बदल सकता है और निराशा को आशा में बदल सकता है।

उपसंहार : हर दिन परमेश्वर के साथ एक नई शुरुआत

परमेश्वर नए आरंभ का परमेश्वर है। उसके साथ जीवन में कभी निराशा स्थायी नहीं रहती। चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों, वह हमेशा नया अवसर खोलने में सक्षम है।

यदि आज आपका मन निराश है, तो याद रखें कि आपका अतीत आपकी पहचान नहीं है। परमेश्वर आपके भविष्य में कुछ नया और सुंदर करने की योजना रखता है। बस उसके साथ चलिए, और प्रत्येक दिन को नई शुरुआत मानकर जीवन का आनंद लीजिए।