भविष्यवाणियाँ पूर्ण हुईं
यीशु मसीह से संबंधित इन कथनों में आप, हर एक के साथ उसके विषय में की गई पुराना नियम की भविष्यवाणी, और सैकड़ों वर्ष बाद उसके पूर्ण होने का नया नियम का विवरण पाएँगे। ये विस्मयकारी सच्चाइयाँ हैं!
1. मसीह इस्राएल से आएगा।
गिनती 24:17-19; मत्ती 1:17
2. मसीह का जन्म दाऊद के परिवार और यहूदा के गोत्र में होगा। उत्पत्ति 49:10 और यशा 11:1; लूका 1:31-33
3. उसका जन्म बेतलेहेम में होगा।
मीका ५:२; लूका २:४-७
4. वह एक कुँवारी से जन्म लेगा। यशा 7:14; मत्ती 1:18,22,23
5. मसीह के आने की घोषणा एक अग्रदूत द्वारा की जाएगी।
– यशा 40:3; मत्ती 3:3
6. मसीह परमेश्वर होगा।
यशा 9:6; यूहन्ना 1:14
7. वह अपने बाल्यकाल का कुछ समय मिस्र में बिताएगा।
होशे 11:1; मत्ती 2:13-17
8. वह दुःख उठाएगा और पापों के लिए प्रायश्चित्त करेगा।
यशा 53:4,6; 2 कुरि 5:29; इब्रा २:17
9. वह गदहे के बच्चे पर सवार होकर यरूशलेम में प्रवेश करेगा।
जक 9:9; मत्ती 21:2-५१०. क्रूस पर दुःख सहते समय उसे पित्त और सिरका दिया जाएगा।
भजन 69:21; मत्ती 27:34
10. क्रूसित किए जाने की रोमी परम्परा के विपरीत, उसकी एक भी हट्टी तोडी नहीं जाएगी। भजन 34:20; यूहन्ना 19:33-36
12. उसके कपड़ों को आपस में बाँट लेने के लिए लोग उनपर चिद्रियों डालेंगे। भजन 22:18; मत्ती 27:35
13. अपनी मृत्यु के समय की वेदना में वह कुछ विशेष शब्द कहेगा।
भजन 22:1; मरकुस 15:34
14. वह मृतकों में से फिर जी उठेगा।
– भजन 16:10; प्रेरि २:23-27
उपसंहार – इन में से हर एक भविष्यवाणी हमारे परमेश्वर की सामर्थ और सर्वज्ञान का एक और प्रमाण है।
मसीह का ईश्वरत्व
हम जानते हैं कि यीशु परमेश्वर है क्योंकि उसमें वे सारे गुण हैं जो मात्र परमेश्वर के हैं। इन पदों का अध्ययन कीजिए जो उन गुणों को बताते हैं:
1. वह अनन्त है (मीका 5:2 और यूहन्ना 8:58; कुलु 1:17; प्रका 1:8)।
2. वह अपरिवर्तनीय है (इब्रा 13:8)।
3. वह सर्वशक्तिमान है (लूका 8:25; मत्ती 25:18)।
4. वह सर्वव्यापी है (मत्ती 18:20; यूहन्ना 1:48; 3:13; मत्ती 28:20)।
5. वह सर्वज्ञानी है (मरकुस 11:2-6; यूहन्ना २:24-25; लूका 5:22; मत्ती 24:3-31)।
6. वह पवित्र है (मरकुस 1:24); पापरहित है (1 पत 2:22; यूहन्ना 19:4)।
7. वह न्यायी है (यूहन्ना 2:14-17, मन्दिर की सफाई करने में); (प्रेरि 17:31, एक धर्मी न्यायाधीश है)।
8. वह प्रेमी है (यूहन्ना 15:13 तथा 11:36)।
9. वह दयालु है (तीतुस 3:5), वह हमारे लिए मरा।
10. वह विश्वासयोग्य है (2 तीमु 2:13)।
परमेश्वर के पाँच कार्य हैं जिनका श्रेय यीशु को जाता है : सृष्टि की रचना (यूहन्ना 1:3), सुरक्षा (इब्रा 1:3), पाप क्षमा (लूका 7:48), मृतको को जिलाना (यूहन्ना 6:39) और न्याय (यूहन्ना 5:२२)।
उपसंहार – यीशु के पुनरुत्थान की सच्चाई इस बात का सबसे ठोस प्रमाण है कि वह परमेश्वर है।
मसीह का मनुष्यत्व
उद्धारकर्त्ता होने के लिए यीशु को न मात्र ईश्वरीय होना और कुँवारी से जन्म लेना था परन्तु उसे सचमुच मनुष्य भी होना अवश्य था (1 तीमु 2:5)। उसके मनुष्यत्व के इन प्रमाणों पर ध्यान दीजिएः
1. उसे मानवीय नाम दिए गए (मत्ती 1:21)। “मनुष्य का पुत्र” यह वाक्यांश 77 बार आया है।
2. उसकी मानवीय वंशावली थी (मत्ती 1-16)।
3. वह भूखा (मत्ती 4:2) और प्यासा हुआ (यूहन्ना 4:7; 19:28)।
4. वह थका (यूहन्ना 4:6) और सोया था (मत्ती 8:24)।
5. उसने प्रेम किया (मत्ती 10:21; यूहन्ना 11:36) और उसमें दया थी (मत्ती 9:36)।
6. वह क्रोधित और दुःखी हुआ (मरकुस 3:4)।
7. वह कराहा (यूहन्ना 11:33); वह रोया (यूहन्ना 11:35; लूका 19:41)।
8. उसके पास देह (यूहन्ना 1:14); प्राण (मत्ती 26:38) और आत्मा (लूका 23:46) थी।
9. वह मर गया (इब्रा 9:27; लूका 23:46)।
निष्कर्ष – परमेश्वर और मनुष्य हाल्लिलूय्याह, कितना महान उद्धारकर्त्ता!
मसीह का जीवन, प्रथम भाग
हमारे प्रभु के पृथ्वी पर के वर्षों का विस्तृत विवरण दिया गया है।
1. जैसे परमेश्वर वैसे ही यीशु भी सर्वदा से अस्तित्व में है। वह सब वस्तुओं से पहले था।
2. कुँवारी मरियम से उसके जन्म लेने का वर्णन मत्ती और लूका में मिलता है।
3. जब वह आठ दिन का हुआ तब उसका खतना किया गया (लूका 2:21)।
4. जब वह बारह वर्ष का था तब उसे यरूशलेम के मन्दिर में ले जाया गया (लूका 2:41-48)।
5. अपने जीवन के आरम्भिक वर्ष उसने बढई के रूप में नासरत में बिताए (मरकुस 6:3)।
6. उसको सेवकाई के पहले छ: महीने यहूदिया, सामरिया और गली में बो
7. दूसरे चरण के 6 से 8 महीने उसने कफरनहूम तथा गलील में प्रचार करने रोगियों की चंगाई और आश्चर्यकर्म करने में बिताए।
यहाँ यीशु के आश्चर्यकों का क्षेत्र दिया गया है:
क. प्रकृति पर (मत्ती 8:26-27)।
ख. दुष्टात्माओं पर -(मरकुस 5:12-13 मत्ती 8:28-32:9:32-33: 15:22-288 17:14-18; मरकुस 1:23-27)।
ग बीमारी पर लकवा (मत्ती ८:१३.९६) अक्षम मनुष्य (यूहना ५:१): सूखा हाथ (मत्ती १२:१३); दुर्बलता की आत्मा (लूका १३:१२); लहू का बहना बन्द किया (मत्ती ९:२२); जलन्धर रोग से चंगाई (लूका १४:१२): ज्वर से चंगा किया (मत्ती ८:१५); गूंगे को बोलने की क्षमता दी (मती ९:३३): अन्धे को दृष्टि (यूहना ९:१-३८); बहिरे को सुनने की शक्ति (मत्ती ११:५); कोड़ चंगा किया (मत्ती ८:३: लूका १७:१९)। यीशु ने कम-से-कम दस विभिन्न प्रकार की बीमारियों को चंगा किया।
घ. मृत्यु पर लाजर (यूहत्र ११:४३-४४); याईर की बेटी (मत्ती ९:१८-२६); नाईन नगर की विधवा का पुत्र (लूका ७:१२-१५)।
ङ. विविध – पानी से दाखरस (यूहना २:१-११), पाँच हजार लोगों को भोजन खिलाना (यूहना ६:१-१४) झील पर चलना (यूहना ६:१५-२१), चार हजार को भोजन खिलाना (मत्ती १५:३२-३९), अंजीर के पेड़ को शापित करना (मत्ती २१:१८-२२), मछली के मुँह में सिक्का पाना (मत्ती १७:२७).
आश्चर्यजनक रूप से मछलियाँ पकड़ना (लुका ५ः१-११: यूहना २१:६)1
उसका स्वयं का पुनरुत्थान सबसे महान आश्चर्यकर्म था (१ कुरि १५:४: रोमि १:४)।
मसीह का जीवन, अन्तिम भाग
8. तृतीय चरण अर्थात् उत्तरकालीन गलीली सेवकाई, गलील में और उसके आस-पास, लगभग एक वर्ष तक रही। भीड़ की भीड़ उसके पीछे चलती थी। उसने पहाड़ी उपदेश दिया (मत्ती अध्याय ५.६ और ७)।
9. अगले चरण में, फरीसी उसे मार डालने के लिए उसके पीछे पड़ गए। यीशु कफरनहूम, फुनिसिया, बेतसैदा, कैसरिया और फिलिप्पी की यात्रा करता हुआ अन्त में फिर गलील में आया।१०. अन्तिम ६ महीने शिक्षा देने, प्रचार करने और यात्रा करने में बिताए।
11. अन्तिम सप्ताह में खजूर का रविवार, अन्तिम भोज, गतसमनी, मुकद्दमे और क्रूस पर की मृत्यु सम्मिलित थी।
12. तीन दिन के बाद, भविष्यवाणी के अनुसार, यीशु मृतकों में से जी उठा।
13. पुनरुत्थान के चालीस दिन बाद वह दृश्य रूप से (सबके देखते) और शरीर सहित स्वर्ग में उठा लिया गया (प्रेरि १:१०,११)।
चर्चा – मसीह के पृथ्वी पर के जीवन की कौन-सी घटनाएँ उसके ईश्वरत्व को प्रदर्शित करती हैं? कौन-सी घटनाएँ उसके मनुष्यत्व को प्रकट करती हैं?
यीशु मसीह का पुनरुत्थान
नया नियम में पुनरुत्थान का उल्लेख एक सौ चार बार आया है और यह पवित्र शास्त्र का बुनियादी सिद्धान्त है। मसीही धर्म ही एकमात्र ऐसा धर्म है जिसका प्रवर्तक (आरम्भ करने वाला) जीवित है।
1. पुनरुत्थान के प्रमाण-
1. खाली कब्र (मत्ती 28:6; लूका 24:3)।
2. स्वर्गदूतों की गवाही (मत्ती 28:46; लूका 24:5-7)।
3. उसके पुनरुत्थान के बाद लोगों ने उससे बातें की: पतरस, मरियम, क्लियुपास और थोमा।
4. यीशु ने खाया, पीया और अपने घाव दिखाए।
5. एक साथ पाँच सौ लोगों ने उसे देखा (1 कुरि 15:6)।
6. स्तिफनुस शहीद हो रहा था तब यीशु उसे दिखाई दिया (प्रेरि 7:56)।
7. वह दमिश्क के मार्ग पर पौलुस को दिखाई दिया (प्रेरि 9:5)।
8. लाखों लोगों ने प्रमाणित किया है कि वह जीवित उद्धारकर्त्ता है।
9. और बहुत-से अचूक (विश्वसनीय) प्रमाण हैं (प्रेरि 1:3)।
2. उसकी पुनरुत्थित देह कैसी थी?
1. उसमें माँस और हड्डियाँ थी (लूका 24:39)।
2. वह महिमामय देह थी (फिलि 3:21)।
3. वह अविनाशी देह थी जिसकी कभी मृत्यु नहीं होगी (रोमि 6:9)।
4. वह आत्मिक देह थी (1 कुरि 15:44)।
उपसंहार आज सबसे अधिक भयावह विजेता मृत्यू है, परन्तु पुनरुत्थान उससे श्री महान सामर्थ है क्योंकि वह कब्र की सामर्थ को पूर्ण रूप से तोड देती है।
