1. परिचय

  • लेखक: मूसा
  • नाम का अर्थ: “लैवी” गोत्र से संबंधित – याजक और उपासना की सेवकाई।
  • स्थान: सीनै पर्वत (निर्गमन 19–गिनती 10 के बीच की अवधि)।
  • मुख्य विषय: परमेश्वर पवित्र है और उसकी प्रजा भी पवित्र हो। (लैव्य. 19:2)

2. मुख्य विषय

  1. उपासना की शुद्धता – बलिदानों और याजकों की विधि।
  2. व्यक्तिगत पवित्रता – दैनिक जीवन, खान-पान, शारीरिक शुद्धता।
  3. सामाजिक पवित्रता – संबंधों, न्याय, पर्वों और धार्मिक रीति-रिवाजों में।
  4. प्रायश्चित्त (Atonement) – पाप के ढँकने और क्षमा के लिए।

3. संरचना (Outline)

🔹 भाग 1: बलिदान और उपासना (अध्याय 1–7)

  • होमबलि (1:1-17) – पूर्ण समर्पण का प्रतीक।
  • अन्नबलि (2) – धन्यवाद और भक्ति।
  • मेलबलि (3) – मेल और संगति का प्रतीक।
  • पापबलि (4) – अनजाने पापों की क्षमा।
  • अपराधबलि (5) – जानबूझकर किए गए अपराधों की भरपाई।

📖 वह अपना हाथ उस होमबलि के सिर पर रखे, और वह उसके लिये स्वीकार किया जाएगा, ताकि उसके लिये प्रायश्चित्त किया जाए।” (लैव्य. 1:4)


🔹 भाग 2: याजकाई सेवा (अध्याय 8–10)

  • हारून और उसके पुत्रों का अभिषेक।
  • नादाब और अबीहू की मृत्यु (10:1-2) → अग्नि केवल वही होनी चाहिए जिसे यहोवा ने ठहराया है।

🔹 भाग 3: शुद्ध और अशुद्ध नियम (अध्याय 11–15)

  • खान-पान के नियम (11:1-47) → पवित्रता के लिए अलग जीवन।
  • शरीर की अशुद्धता (12–15) → पाप और अशुद्धता को अलग करने का प्रतीक।

📖 क्योंकि मैं यहोवा तुम्हारा परमेश्वर हूँ; इसलिये तुम अपने आप को पवित्र ठहराओ और पवित्र बनो, क्योंकि मैं पवित्र हूँ।” (लैव्य. 11:44)


🔹 भाग 4: प्रायश्चित्त का दिन (Day of Atonement) (अध्याय 16)

  • महायाजक वर्ष में एक बार परमपवित्र स्थान में प्रवेश करता था।
  • दो बकरों में से एक बलि चढ़ाया जाता और दूसरा “अज़ाज़ेल” के लिए जंगल में भेजा जाता।
  • यह मसीह की बलि का प्रतीक है (इब्रानियों 9:11-12)।

📖 क्योंकि उस दिन तुम्हारे लिये प्रायश्चित्त किया जाएगा, ताकि तुम्हें शुद्ध किया जाए।” (लैव्य. 16:30)


🔹 भाग 5: पवित्रता की आज्ञाएँ (अध्याय 17–27)

  • रक्त का महत्व (17:11) – क्योंकि प्राणी का प्राण उसके लहू में है।”
  • नैतिक नियम (18–20) – यौन पापों और मूर्तिपूजा से अलग रहना।
  • याजक और पर्व (21–23) – यहोवा के पर्व (पास्का, पिन्तेकुस्त, तम्बूवाले पर्व आदि)।
  • यहोवा का वर्ष (25) – विश्राम वर्ष और जुबली वर्ष।
  • आशीष और शाप (26) – आज्ञाकारिता में आशीष, अवज्ञा में शाप।
  • प्रतिज्ञाएँ और भेंटें (27)।

4. प्रमुख बाइबल पद

  • लैव्यव्यवस्था 11:44 – पवित्र बनो क्योंकि मैं पवित्र हूँ।”
  • लैव्यव्यवस्था 16:30 – प्रायश्चित्त का दिन।
  • लैव्यव्यवस्था 17:11 – लहू प्राण के प्रायश्चित्त के लिये है।”
  • लैव्यव्यवस्था 19:18 – तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम करना।”
  • लैव्यव्यवस्था 20:7 – अपने आप को पवित्र ठहराओ और पवित्र बनो।”

5. आध्यात्मिक शिक्षा

  1. पवित्रता का महत्व – परमेश्वर चाहता है कि उसकी प्रजा अलग और पवित्र जीवन जिए।
  2. बलिदान का महत्व – हर बलिदान मसीह की ओर संकेत करता है।
    • होमबलि → मसीह का पूर्ण समर्पण।
    • पापबलि → मसीह का क्रूस पर बलिदान।
    • मेलबलि → हमारे मेल का स्रोत।
  3. प्रायश्चित्त का दिन – मसीह ने सदा के लिए एक बार बलिदान दिया (इब्रानियों 10:10-12)।
  4. पड़ोसी से प्रेम – यह नया नियम का महान आज्ञा का आधार है (मत्ती 22:39)।

6. आज के लिए अनुप्रयोग

  • क्या मैं पवित्र जीवन जी रहा हूँ या संसार के समान हो गया हूँ?
  • क्या मेरे जीवन में मसीह के बलिदान का अनुभव है?
  • क्या मैं परमेश्वर की उपस्थिति और उसकी पवित्रता का आदर करता हूँ?
  • क्या मैं दूसरों से अपने समान प्रेम करता हूँ?

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