परमेश्वर और मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु

1. शैतान का आरम्भ

1. शैतान का वर्णन यहेजकेल २8:12-19 में किया गया है। वह सुंदरता में श्रेष्ठ था, संभवतः प्रधान स्वर्गदूत था। फिर उसके घमंड के कारण उसमें पाप और दुष्टता समा गई और उसे स्वर्ग से निकाल दिया गया।

२ . उसका वर्णन यशायाह 14:12-17 में भी किया गया है। वह लूसिफर अर्थात् भोर का पुत्र कहलाता था। उसके घमंड ने उसमें सर्वोच्च महान

परमेश्वर के तुल्य होने की इच्छा भर दी, इसलिए उसे बाहर निकाल दिया गया।

३. शैतान एक वास्तविक व्यक्ति है जिसमें जीवन बुद्धि, इच्छा शक्ति तथा भावनाएँ हैं।

२. शैतान का चरित्र

1. वह चोर, हृदय से परमेश्वर के वचन को चुराने वाला है (मत्ती

13:19)।

२. वह चतुर है (२ कुरि 11:3)।

३. वह हत्यारा है (यूहन्ना 8:44)।

4. वह झूठा है (यूहन्ना 8:44)।

5. वह भरमाने वाला है (प्रका 1२:9)।

चर्चा – क्या आप को लगता हैं कि शैतान इन दिनों में संसार में अधिक सक्रिय

हो रहा है? आपके विचार से ऐसा क्यों है? पाठ ३5 पराजित शत्रु

१. शैतान के शीर्षक

१. ज्योतिर्मय स्वर्गदूत (२ कुरि 11:14)।

२. गरजने वाला सिंह (1 पत 5:8)।

३. आकाश के अधिकार का हाकिम (इफि २:२)।

4. अन्धकार की शक्ति (कुलु १:१३)।

5. बड़ा अजगर, पुराना साँप, इबलीस, शैतान (प्रका 1२:9)।

6. इस संसार का सरदार (यूहन्ना 14:३०)।

7. इस संसार का ईश्वर (२ कुरि 4:4)।

8. अथाह कुण्ड का दूत, जिसका नाम इब्रानी में अबद्दोन है (प्रका 9:11)।

2. शैतान का भाग्य

1. जहाँ तक मसीही विश्वासी की बात है, उस शत्रु पर विजय पा ली गई

है (यूहन्ना १२:३१; १६:९,१०; १ यूहन्ना ३:८; कुलु २:१५)।

२. वह अनन्त शाप के अधीन है (उत्प ३:१४; यशा ६५:२५)।

३. वह आग की झील में जीवित डाला जाएगा ताकि वहाँ युगानुयुग पीड़ा में रहे (मत्ती २५:४१; प्रका २०:१०)।

उपसंहार – शैतान शक्तिमान है परन्तु परमेश्वर सर्वशक्तिमान है। शैतान कलवरी पर हमेशा के लिए पराजित कर दिया गया। आइए हम कलवरी के लहू के द्वारा निरंतर उस पर विजय का दावा करें (प्रका १२:११)।

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