पवित्र शास्त्र का सिद्धान्त
बाइबल की प्रेरणा
1. बाइबल के विषय में कुछ तथ्य
1. बाइबल 66 पुस्तकों का ग्रंथालय है; पुराना नियम में 39 तथा नया नियम में 27 पुस्तकें हैं।
२. यह 1600 वर्षों के समय में, विश्व के विभिन्न स्थानों के विभिन्न प्रकार के लोगों में से 36 से 40 लेखकों द्वारा लिखी गई थी।
३. पुराना नियम मूलतः इब्रानी भाषा में लिखा गया था जिसमें दानिय्येल तथा एना की पुस्तकों के कुछ भाग अरामी भाषा में थे। नया नियम यूनानी भाषा में लिखा गया था।
४. बाइबल, अस्तित्व में सबसे पुरानी पुस्तक है। इसे लिखने में १६ शताब्दियाँ लगीं; अन्तिम लेखक के पैदा होने से 1450 वर्ष पहले प्रथम लेखक की मृत्यु हो गई थी।
२. प्रेरणा का अर्थ
१. यूनानी भाषा में ‘थियोज्यूस्टोस’ शब्द का प्रयोग हुआ है जिसका अर्थ ‘परमेश्वर ने श्वास फूँका’ है। थिओ परमेश्वर, प्यूस्टोस श्वास फूंका (२ तीमु 3:16)।
२. परमेश्वर के पवित्र लोगों ने, जिन पर पवित्र आत्मा छाया था, परमेश्वर की आज्ञा पर इसे लिखा और समस्त त्रुटियों से बचाए गए।
३. बाइबल प्रेरणा का दावा करती है
1. लेखकों के लिए (२ पत १:२१)।
२. लिखित पाठ के लिए (२ तीमु ३:१६)।
३. शब्दों के लिए (१ कुरि २:१३; २ पत ३:२)।
चर्चा- आपको बाइबल की अनोखी विशेषताओं में से कौन-सी सबसे अधि क प्रभावित करती हैं?
बाइबल के विषय में दो प्रकार की सात बातें
१. बाइबल के सात सर्वोच्च आश्चर्य
१. इसकी संरचना का आश्चर्यः एक पुस्तक एक स्थान पर एक भाषा में लिखी गई, दूसरी पुस्तक दूसरे देश में सदियों बाद दूसरी भाषा में लिखी गई।
२. इसकी एकता का आश्चर्यः यह ६६ पुस्तकों का ग्रंथालय है, फिर भी वह एक ही पुस्तक है, क्योंकि इसका एक ही लेखक है पवित्र आत्मा। इसमें विरोधाभास नहीं है।
३. इसकी आयु का आश्चर्यः यह सारी पुस्तक में सबसे प्राचीन है।
4. इसकी बिक्री का आश्चर्यः यह सभी समयों में सबसे ज्यादा बिकने वाली पुस्तक है।
5. इसकी रुचि का आश्चर्यः मात्र यही एक पुस्तक है जो सारे राष्ट्रों में, मानवजाति के हर आयु के लोगों द्वारा ज्ञानियों और बालकों द्वारा पढ़ी जाती है।6. इसकी भाषा का आश्चर्य: अधिकतर अशिक्षित लोगों के द्वारा लिखी गई यह पुस्तक साहित्य की एक श्रेष्ठ रचना मानी जाती है।
7. इसके सुरक्षित रहने का आश्चर्य: बार-बार राजाओं और सरकारों ने इसे जला देने और मिटा देने के प्रयास किए हैं। फिर भी परमेश्वर ने आज इसे हमारे लिए सुरक्षित रखा है और यह लगभग प्रत्येक घर में पाई जाती है। करने उपयोग में
२. परमेश्वर के वचन को स्पष्ट लाए गए सात प्रतीक-१. तलवार, जो सुनने वाले को कायल करती है (इब्रा 4:12)।
२. हथौड़ा, जो सुनने वाले के विरोध को तोड़ता है (यिर्म 23:29)।
३. बीज, जीवित वचन जो विश्वासी को जन्म देता है (1 पत 1:23.25)।
4. दर्पण, जो व्यक्ति पर उसकी अपनी वास्तविकता प्रकट करता है (याकूच 1:23,)।
5. आग, जो सुनने वाले के भीतर के मैल को भस्म करती है (यिर्म २०:9; 23:२9)।
6. दीपक, जो विश्वासी का दिन-प्रतिदिन मार्गदर्शन करता है (भजन 119:105)।
7. भोजन, जो आत्मा का पोषण करता है (1 पत २:२; 1 कुरि ३:२; रोमि 10:17)।
अभ्यास-कार्य – परमेश्वर के वचन के किसी एक प्रतीक का प्रयोग करते हुए एक वस्तुपाठ तैयार कीजिए।
परमेश्वर के वचन का प्रचार क्यों करें?
1. पाप के लिए दोषी ठहराया जाना परमेश्वर के वचन के प्रचार से संभव होता है (प्रेरि २:14-37)। पतरस के पिन्तेकुस के उपदेश में २३ में से 9 पद पुराना नियम से लिए गए उद्धरण हैं।
२. परमेश्वर के वचन को सुनने से विश्वास होता है (रोमि १०:१७)।
३. परमेश्वर का वचन शुद्ध करने का कार्य करता है (२ कुरि ७:१)। प्रतिज्ञाएँ परमेश्वर के वचन हैं।
4. परमेश्वर के वचन से आश्वासन मिलता है (१ यूहन्ना ५:१३)।
5. परमेश्वर के वचन से शान्ति मिलती है (१ थिस्स ४:१८ इस वचन में “बातों” का अर्थ बाइबल में लिखित वचन हैं)।
6. परमेश्वर के वचन से सत्य का ज्ञान होता है (प्रेरि १७:११)।
7. परमेश्वर के वचन से नया जन्म प्राप्त होता है (१ पत १:२३)। उपसंहार- मसीह तथा पवित्र आत्मा के बाद, बाइबल परमेश्वर का संसार को दिया गया तीसरा सबसे बड़ा उपहार है।
बाइबल की प्रेरणा
1. बाइबल के विषय में कुछ तथ्य
1. बाइबल 66 पुस्तकों का ग्रंथालय है; पुराना नियम में 39 तथा नया नियम में 27 पुस्तकें हैं।
२. यह 1600 वर्षों के समय में, विश्व के विभिन्न स्थानों के विभिन्न प्रकार के लोगों में से 36 से 40 लेखकों द्वारा लिखी गई थी।
३. पुराना नियम मूलतः इब्रानी भाषा में लिखा गया था जिसमें दानिय्येल तथा एना की पुस्तकों के कुछ भाग अरामी भाषा में थे। नया नियम यूनानी भाषा में लिखा गया था।
४. बाइबल, अस्तित्व में सबसे पुरानी पुस्तक है। इसे लिखने में १६ शताब्दियाँ लगीं; अन्तिम लेखक के पैदा होने से 1450 वर्ष पहले प्रथम लेखक की मृत्यु हो गई थी।
२. प्रेरणा का अर्थ
१. यूनानी भाषा में ‘थियोज्यूस्टोस’ शब्द का प्रयोग हुआ है जिसका अर्थ ‘परमेश्वर ने श्वास फूँका’ है। थिओ परमेश्वर, प्यूस्टोस श्वास फूंका (२ तीमु 3:16)।
२. परमेश्वर के पवित्र लोगों ने, जिन पर पवित्र आत्मा छाया था, परमेश्वर की आज्ञा पर इसे लिखा और समस्त त्रुटियों से बचाए गए।
३. बाइबल प्रेरणा का दावा करती है
1. लेखकों के लिए (२ पत १:२१)।
२. लिखित पाठ के लिए (२ तीमु ३:१६)।
३. शब्दों के लिए (१ कुरि २:१३; २ पत ३:२)।
चर्चा- आपको बाइबल की अनोखी विशेषताओं में से कौन-सी सबसे अधि क प्रभावित करती हैं?
बाइबल के विषय में दो प्रकार की सात बातें
१. बाइबल के सात सर्वोच्च आश्चर्य
१. इसकी संरचना का आश्चर्यः एक पुस्तक एक स्थान पर एक भाषा में लिखी गई, दूसरी पुस्तक दूसरे देश में सदियों बाद दूसरी भाषा में लिखी गई।
२. इसकी एकता का आश्चर्यः यह ६६ पुस्तकों का ग्रंथालय है, फिर भी वह एक ही पुस्तक है, क्योंकि इसका एक ही लेखक है पवित्र आत्मा। इसमें विरोधाभास नहीं है।
३. इसकी आयु का आश्चर्यः यह सारी पुस्तक में सबसे प्राचीन है।
4. इसकी बिक्री का आश्चर्यः यह सभी समयों में सबसे ज्यादा बिकने वाली पुस्तक है।
5. इसकी रुचि का आश्चर्यः मात्र यही एक पुस्तक है जो सारे राष्ट्रों में, मानवजाति के हर आयु के लोगों द्वारा ज्ञानियों और बालकों द्वारा पढ़ी जाती है।6. इसकी भाषा का आश्चर्य: अधिकतर अशिक्षित लोगों के द्वारा लिखी गई यह पुस्तक साहित्य की एक श्रेष्ठ रचना मानी जाती है।
7. इसके सुरक्षित रहने का आश्चर्य: बार-बार राजाओं और सरकारों ने इसे जला देने और मिटा देने के प्रयास किए हैं। फिर भी परमेश्वर ने आज इसे हमारे लिए सुरक्षित रखा है और यह लगभग प्रत्येक घर में पाई जाती है। करने उपयोग में
२. परमेश्वर के वचन को स्पष्ट लाए गए सात प्रतीक-१. तलवार, जो सुनने वाले को कायल करती है (इब्रा 4:12)।
२. हथौड़ा, जो सुनने वाले के विरोध को तोड़ता है (यिर्म 23:29)।
३. बीज, जीवित वचन जो विश्वासी को जन्म देता है (1 पत 1:23.25)।
4. दर्पण, जो व्यक्ति पर उसकी अपनी वास्तविकता प्रकट करता है (याकूच 1:23,)।
5. आग, जो सुनने वाले के भीतर के मैल को भस्म करती है (यिर्म २०:9; 23:२9)।
6. दीपक, जो विश्वासी का दिन-प्रतिदिन मार्गदर्शन करता है (भजन 119:105)।
7. भोजन, जो आत्मा का पोषण करता है (1 पत २:२; 1 कुरि ३:२; रोमि 10:17)।
अभ्यास-कार्य – परमेश्वर के वचन के किसी एक प्रतीक का प्रयोग करते हुए एक वस्तुपाठ तैयार कीजिए।
परमेश्वर के वचन का प्रचार क्यों करें?
1. पाप के लिए दोषी ठहराया जाना परमेश्वर के वचन के प्रचार से संभव होता है (प्रेरि २:14-37)। पतरस के पिन्तेकुस के उपदेश में २३ में से 9 पद पुराना नियम से लिए गए उद्धरण हैं।
२. परमेश्वर के वचन को सुनने से विश्वास होता है (रोमि १०:१७)।
३. परमेश्वर का वचन शुद्ध करने का कार्य करता है (२ कुरि ७:१)। प्रतिज्ञाएँ परमेश्वर के वचन हैं।
4. परमेश्वर के वचन से आश्वासन मिलता है (१ यूहन्ना ५:१३)।
5. परमेश्वर के वचन से शान्ति मिलती है (१ थिस्स ४:१८ इस वचन में “बातों” का अर्थ बाइबल में लिखित वचन हैं)।
6. परमेश्वर के वचन से सत्य का ज्ञान होता है (प्रेरि १७:११)।
7. परमेश्वर के वचन से नया जन्म प्राप्त होता है (१ पत १:२३)। उपसंहार- मसीह तथा पवित्र आत्मा के बाद, बाइबल परमेश्वर का संसार को दिया गया तीसरा सबसे बड़ा उपहार है।
