मसीह का द्वितीय आगमन
बताया जाता है कि मसीह के द्वितीय आगमन का उल्लेख नया नियम के 260 नायों में 318 बार हुआ है; वह प्रत्येक २5 पदों में से एक का विषय है। बाइबल के प्रत्येक ३० पदों में से एक पद इस सिद्धान्त का उल्लेख करता है; प्रभु के प्रथम आगमन के हर एक उल्लेख के लिए दूसरे आगमन का आठ बार उल्लेख हुआ है।
१. मसीह का आगमन कैसे होगा?
१. कलीसिया के ऊपर उठाए जाने (त्वजनतम) के समय वह गुप्त रूप सेहोगा (१ थिस्स 5:2; मत्ती 28:44: २४:5०)।
२. संसार के लिए प्रकाशन (त्मअमसंजपवद) के समय वह सार्वजनिक रूप से होगा (प्रका १:७)।
२. मसीह का आगमन कहाँ होगा?
१. कलीसिया के ऊपर उठाए जाने (त्वजनतम) के समय हम उससे हवा में मिलेंगे (१ थिस्स ४:१७)।
२. संसार के लिए प्रकाशन (त्मअमसंजपवद) के समय हम उसके साथ पृथ्वी पर उतरेंगे (जक १४:४)।
३. उसके आगमन के चिन्ह
दूसरा तीमुथियुस ३:१-७ में उसके आगमन के २३ चिन्ह दिए गए हैं जिनमें से अनेक आज प्रकट हैं। मत्ती २४:५-७ तथा १२-३८ में दस चिन्ह दिए गए हैं।
हमें ऐसी योजना बनानी और कार्य करने चाहिए जैसे कि यीशु अगले सौ वर्षों तक नहीं आ रहा है, परन्तु ऐसा पवित्र और शुद्ध जीवन जीना चाहिए जैसे कि वह आज ही आने वाला है (१ थिस्स ३:१२,१३)।
बाइबल की अन्तिम प्रार्थना है, “हे प्रभु यीशु आ” (प्रका २२:२०)।
चर्चा – “उसके आगमन के चिन्ह” के अन्तर्गत दिए गए बाइबल सन्दर्भों में जो चिन्ह हैं उनमें से कौन-सी परिस्थितियाँ आज विद्यमान हैं?
मृतकों का पुनरुत्थान
१. यह सिद्धान्त पवित्र शास्त्र में स्पष्ट रूप से सिखाया गया है।
१. पुराना नियम में –
अय्यूब १९:२५-२७; भजन १६:९; १७:१५; दानि १२:१-३
१ राजा १७; २ राजा ४:३२-३५ तथा १३:२१ में वास्तविक पुनरुत्थान का वर्णन है।
२. नया नियम में –
यीशु की शिक्षा में यूहन्ना ५:२८-२९ ६:३९, ४०, ४४, ५४; लूका १४:१३-१४; २०:३५-३६
प्रेरितों की शिक्षा में प्रेरि २४:१५; १ कुरि १५; १ थिस्स ४:१४-१६; फिलि ३:११: प्रका २०:४-६,१३
२. पुनरुत्थित देह का रूप
१. विश्वासी की पुनरुत्थित देह १ कुरि १५:३५-५७ देखिए।माँस तथा लहू नहीं पद ५०, ५१ (तथा इब्रा २:१४; २ कुरि ५:१-६)। “माँस और हड्डियाँ” मात्र आत्मा नहीं एक वास्तविक देह (लूका २४:३९)।
अविनाशी – पद 42; उसमें सड़न, बीमारी, पीड़ा नहीं होगी।
महिमामय पद 43; रूपान्तरण भी (मत्ती 17:२,३; प्रका 1:13-17)।
सामथी पद 43; थकी, दुर्बल नहीं।
एक आत्मिक देह पद ४४; आत्मा देह का जीवन होगी।
स्वर्गीय देह पद 47-49।
२. अविश्वासी की पुनरुत्थित देह पवित्र शास्त्र इस विषय पर कुछ नहीं कहती।
३. पुनरुत्थान का समय
१. धर्मियों का पुनरुत्थान (१ कुरि 15:23; 1 थिस्स 4:14-17) – धर्मियों का पुनरुत्थान यीशु के आगमन से जुड़ा है।
२. दुष्टों का पुनरुत्थान (यूहन्ना 5:२8-२9; दानि १२:२; प्रका २०:5; २०:१२) – दुष्टों का पुनरुत्थान हमेशा न्याय से जोड़ा गया है और वह यहोवा के दिन के अन्त में होगा। प्रका २०:४-६ यह संकेत करता है कि धर्मियों तथा दुष्टों के पुनरुत्थान के बीच कम-से-कम एक हजार वर्ष का अंतराल होगा।
चर्चा – हमारी पुनरुत्थित देह, हमारी आज की देह से किस प्रकार भिन्न होगी?
न्याय
संसार के लिए न्याय का एक दिन निश्चित कर दिया गया है, जिसमें दुष्टों का न्याय होगा तथा धर्मी इनाम पाएँगे (प्रेरि १७:३१; इब्रा ९:२७)। न्यायाधीश यीशु है, जो क्रूस पर चढ़ा था वही सिंहासन पर विराजमान होगा (यूहन्ना ५:२२, २३, २७; २ तीमु ४:१; २ कुरि ५:१० प्रेरि १०:४२; १७:३१)।
चूँकि एक से अधिक पुनरुत्थान हैं, अतः एक से अधिक न्याय भी हैं। नूह के दिनों में जल-प्रलय से तथा बाबुल के गुम्मट पर भाषा में गड़बड़ी से न्याय हुआ था। बाइबल कम-से-कम सात विभिन्न न्याय के विषय में बताती है:
१. न्याय जो क्रूस पर हुआ विश्वासियों पर की शैतान की सामर्थ को तोड़ा गया तथा विश्वासी के पापों का न्याय हुआ और उन्हें हटा दिया गया (यूहन्ना ५:२४. १ पत २:२४)।माँस तथा लहू नहीं पद ५०, ५१ (तथा इब्रा २:१४; २ कुरि ५:१-६)। “माँस और हड्डियाँ” मात्र आत्मा नहीं एक वास्तविक देह (लूका २४:३९)।
अविनाशी – पद ४२; उसमें सड़न, बीमारी, पीड़ा नहीं होगी।
महिमामय पद ४३; रूपान्तरण भी (मत्ती १७:२,३; प्रका १:१३-१७)।
सामथी पद ४३; थकी, दुर्बल नहीं।
एक आत्मिक देह पद ४४; आत्मा देह का जीवन होगी।
स्वर्गीय देह पद ४७-४९।
२. अविश्वासी की पुनरुत्थित देह पवित्र शास्त्र इस विषय पर कुछ नहीं कहती।
३. पुनरुत्थान का समय
१. धर्मियों का पुनरुत्थान (१ कुरि १५:२३; १ थिस्स ४:१४-१७) – ध र्मियों का पुनरुत्थान यीशु के आगमन से जुड़ा है।
२. दुष्टों का पुनरुत्थान (यूहन्ना ५:२८-२९; दानि १२:२; प्रका २०:५; २०:१२) – दुष्टों का पुनरुत्थान हमेशा न्याय से जोड़ा गया है और वह यहोवा के दिन के अन्त में होगा। प्रका २०:४-६ यह संकेत करता है कि धर्मियों तथा दुष्टों के पुनरुत्थान के बीच कम-से-कम एक हजार वर्ष का अंतराल होगा।
चर्चा – हमारी पुनरुत्थित देह, हमारी आज की देह से किस प्रकार भिन्न होगी?
दुष्टों का अन्तिम भविष्य
मात्र नया नियम में ही १६२ पाठ हैं जो पश्चात्तापहीन लोगों के उस विनाश के विषय में बताते हैं जो उनकी प्रतीक्षा कर रहा है, उनमें से ७० स्वयं यीशु के द्वारा कहे गए हैं।
मसीह को अस्वीकार करने वाले दुष्ट नरक में डाले जाएँगे (भजन ९:१७)।
१. परिभाषा नरक क्या है?
१. परमेश्वर की उपस्थिति से निकाल दिया जाना (२ थिस्स १:९)।
२. पीड़ा और दंड़ का स्थान (लूका १६:२३)।
२. नरक का वर्णन
१. यह मूल रूप से शैतान तथा उसके दुष्ट दूतों के लिए तैयार किया गया था (मत्ती २५:४१)। परन्तु वे लोग जो उद्धारकर्ता यीशु के द्वारा प्राप्त होने वाले स्वर्ग का इनकार करते हैं उन्हें शैतान के साथ वहाँ जाना होगा।
