Author: Gendlal Vikey

गडरिओं ने देखा उजियाला आधी रात | वे बारी-बारी गल्ले की करते रखवारी, आ वाणी प्यारी बोला फिरिश्ता | फ़रमाया उसने बेथलहम तुम जाओ, कि पैदा हुआ यीशु मसीहा | कपड़े में लिपटा तुम को मिलेगा एक बच्चा, कि चरणी का भी चमका सितारा | Gaḍarioan ne dekha ujiyala adhi rat | Ve bari-bari galle ki karate rakhavari, a vaṇi pyari bola firishta | Faramaya usane bethalaham tum jao, Ki paida hua yishu masiha | Kapaḍae me lipaṭa tum ko milega ek bachcha, Ki charaṇi ka bhi chamaka sitara |

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गावों -गावों , नगर-नगर, डगर-डगर पे, येशु प्रचार करेंगे,हो हो,येशु प्रचार करेंगे। ये मेरा तन मन उन्ही का है, जहां से ये जीवन मिलता है, क्यो नहीं…क्यो नहीं करे प्रश्शंसा उसीकी,….. उसने कहा था, विश्वास कर लो, आत्मा को मै उण्डेलूंगा, क्यो नहीं.. क्यो नहीं करे स्तुित प्रभु की… नथनो का एश्वास मेरा उसी का है, जो येशु येशु कहता है, क्यो नहीं.. क्यो नहीं गाउं मिहमा येशु की… Gaon -gaon , nagar-nagar, ḍagar-ḍagar pe, Yeshu prachar karenge, ho ho! yeshu prachar karenge। Ye mera tan man unhi ka hai, Jahaan se ye jivan…

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रूह मेरी खुश होती सिर्फ तेरे हुज़ूर मुसीबत में तू ही है आस तू दिन में तसल्ली और रात में सुरूर तू मेरी उम्मेद और मीरास तू भेड़ो को ले कर कहाँ जाता चौपान है कहाँ वह खुश चरागाह तो मौत की इस वादी में मैं क्यूँ हैरान या इस जंगल में फिरूँ तनहा मैं क्यूँ तुझसे भटकूं आवारा और दूर और जंगल में करूँ फ़रियाद इन आंसू और रंज-ओ-तक़लीफ़ पर ज़रूर सब दुश्मन तो होवेंगे शाद निगाह जब वह करता सब फ़िरिश्तगान क्या खुशी से होते ख़ुरसन्द वह बोलता और गूंजता ज़मीन ओ ज़मान और करता ख़ुदावन्द की हम्द…

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