Author: Gendlal Vikey

कहाँ मैं जाऊँ जब हूँ मैं निराश कहाँ मैं जाऊँ जीवन से हताश कहाँ मैं जाऊँ जब हूँ में निर्बल कहाँ मैं जाऊँ जाऊँगा यीशु के पास पापों के दल दल में – मैं डूबा जाता था कोई न जग में मिला – जो मुझको बचा सके यीशु पास आया – अपने लहू से मुझको आज़ाद किया (२) कोई न समझा मुझे – दोस्तो ने भि छोड़ दिया जीवन से थक गया था – चाहता था मौत आजाएँ यीशु पास आया – उसने मुझको प्यार से गले लगाया (२) भाईयों और बहनों – न हो तुम कभी निराश अपने जीवन…

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कलवरी पर यीशु मुआ .. .. .. वहाँ जीवन का सोता निकाला पापी प्यास तू अपनी बुझा .. .. .. 2 उसके पंजर में भाला छिदा उसके हाथों में कीले ठुखे उसने क्या क्या दुःख न सहा । . .. .. 2 कलवरी… उसके लहू से ले तू नहा साफ होंगे तेरे गुनाह वह सब के लिए है मुआ ।. .. .. 2 कलवरी… हे पापीयों तुम भी पीओ, हे धर्मियों तुम भी पीओ वह सब के लिए है मुआ । . .. .. 2 कलवरी… Kalavari par yishu mua .. .. .. 2 Vaha jivan ka sota nikala Papi…

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कल के भरोसे पर न रहना कल का भरोसा, कभी ना करना, कल क्या हागा, किसीने ना जाना, किसीने ना जाना। जहाँ से आया, वही जाना है, जिसने दिया है, उसने लिया है, तेरा ये जिवन, उसकी अमानत, इसपर ना, नाझ करना । ये तन तेरा, मीट जायेगा, ये धन तेरे, संग ना आयेगा, मन को रिझाये, बंधन ये झूठे, भुलेगा तुझको जमाना। आज ही दिलमें, मसीहको बसाले, करदें ये जीवन, उसके हवाले होगी बहारे, जीवन मे तेरे, होगा सफर ये सुहाना Kal ke bharose par n rahana Kal ka bharosa, kabhi na karana, Kal kya haga, kisine na jana,…

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