Author: Kuldeep Kumre

स्वर्ग के सहजादे दिल मैं मेरे आ,तू सिष्ट मे है पहलौठा, जीवन मे मेरे तू आ। 1.धरती तेरी आकाश भी तेरा, तेरा है सारा जहाँ,मुझको मिलेगा तेरे जेसा, ईश्वर प्यारा कहाँ,सारी सिष्ट की रचना, हुई है तेरे ही द्वार, तू सिष्ट मे……. 2.तू जहाँ का है उजयाला, तुझमे मै ज्योत पाएँ,तेरे ही पिछे हरदम चलूँ मै, ताकी मै ठोकर न खाँ,मुझकोभी अपने ही जेसे, एक नयी सिष्ट बना, तू सिष्ट मे.. 3.आमीन भी तू है, विश्वासयोग्य तू है, सच्चा गवाह भी तू है,संतो का तू ही, है पहला फल, जो मृत्यु से जी उठा है,संपुणर्ता हो तुझमे, ऐसे पिता ने…

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स्वर्ग मेरा देश, स्वर्ग मेरा घर,यहाँ परदेशी हूँ, सराय मे रहता हूँ,मै अब यात्रा मे हूँ । 1.कैसा शोभायमान है वह-स्वर्ग मेरा देश,सुन्दर भी अनुपम है – स्वर्ग मेरा घर,चलते चलते इस जग मे मै,विश्वास ही से देखता हूँ। 2.सदा दुत मधुर गाते – स्वर्ग मे रहते,बिना विश्राम लिए वे – स्वर्ग मे गाते,देखेंगे वहा उनको भी,निश्वय मै यह जानता हूँ । 3.कब मै जाउं, कब जाउं-त्राताके निकट,उसको मै कब देखु – मेरा प्रीतम वह,सदा उसके साथ मे रहूं,वही दिल से चाहता रहूं। 4.अब मै जिल्द जाउ उस पार-जहा मेरा घर,यात्रा का अंत दिखता है-स्थान वह मनोहर,मुझ से पहले जो…

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स्वर्ग से उंडेल प्रभु अग्नि सा जीवनमुझको तू दे प्रभु भरपूर जीवन 1.आत्मा की प्यास अब लगा मेरे अंदरमन में भर दे प्रभु परिशुद्ध जीवन 2.अग्नि जला प्रभु प्रेम की मन मेंप्रेम करूँ तुझे पूरी लगन से 3.तन मन धन अब देता तुझे मैंविनती करूँ प्रभु दे स्वर्गीय जीवन 4.आत्मा की प्यास मेरे मन में लगा देस्तुति गाना मुझको सिखा दे 5.जीवन के जल से पीयूँ में आकेमुझसे बहा प्रभु नदियों सा जीवन 6.यीशु के लहू से पूरी कर तू पवित्रपाप और मृत्यु से कर तू स्वतंत्र 7.मेरे लिये पूरी कर अब प्रतिज्ञामन में लगा प्रभु अपना सिंहासन Svarga se…

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