Author: Shalem John
मनुष्य की मूल स्थिति मनुष्य परमेश्वर के स्वरूप और समानता में बनाया गया था (उत्प 1:26 तथा 9:6)। स्वरूप का अर्थ किसी आकृति की छाया या रूपरेखा होता है। समानता उस छाया की आकृति के साथ समरूपता होना सूचित करती है। 1. परमेश्वर के स्वरूप का अर्थ शारीरिक समानता को व्यक्त नहीं करता, क्योंकि परमेश्वर आत्मा है। 2. प्रथम मानव बुद्धिमान था। उसने पशुओं के नाम रखे (उत्प २:19,20)। उसमें बोलने, तर्क करने तथा सोचने की सामर्थ थी। 3. उसमें नैतिक तथा आत्मिक प्रतिभाएँ (क्षमताएँ) थीं। चर्चा – मनुष्यों के लिए पतन के पूर्व का जीवन, आज के जीवन से,…
मन फिराव (पश्चात्ताप) मन फिराव पवित्र शास्त्र बाइबल का एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है, जिसका उल्लेख 100 से अधिक बार हुआ है। 1. मन फिराव की परिभाषाः 1. नकारात्मक – यह पाप के कारण मात्र दुःखी होना नहीं है। कई लोग पाप करने पर रोते हैं परन्तु तुरन्त उसकी ओर लौट जाते हैं। यहूदा इस्करियोति तथा एसाव ने पाप के लिए दुःख प्रकट किया (इब्रा १२:१७), परन्तु उन्होंने मन नहीं फिराया। 2. सकारात्मक यह मन का वह परिवर्तन है जो व्यवहार में परिवर्तन लाता है (मत्ती २१:२८-३२)। 2. मन फिराव का महत्वः 1. यूहन्ना बपतिस्मादाता के संदेश का विषय…
कलीसिया की परिभाषा तथा स्थापना परमेश्वर का इस युग में सर्वोच्च कार्य कलीसिया को एकत्रित करना है। कलीसिया की परिभाषा 1. मसीही कलीसिया नया नियम की संस्था है जो पिन्तेकुस्त से आरम्भ हुई और सम्भवतः मसीह के द्वितीय आगमन, कलीसिया के उठाए जाने के साथ समाप्त होगी। 2. “कलीसिया” शब्द, यूनानी शब्द “एक्लेसिया” से आता है. जिसका अर्थ “से बाहर बुलाया जाना” है। मसीही लोग संसार की व्यवस्था से बाहर बुलाए गए हैं कि वे “मसीह में” हो (1 कुरि 1:२)। 3. कलीसिया शब्द का अर्थ विश्वासियों का एक स्थानीय समूह हो सकता है (कुलु 4:15)। 4. इसका अर्थ विश्वव्यापी…