कलीसिया की परिभाषा तथा स्थापना
परमेश्वर का इस युग में सर्वोच्च कार्य कलीसिया को एकत्रित करना है।
कलीसिया की परिभाषा
1. मसीही कलीसिया नया नियम की संस्था है जो पिन्तेकुस्त से आरम्भ हुई और सम्भवतः मसीह के द्वितीय आगमन, कलीसिया के उठाए जाने के साथ समाप्त होगी।
2. “कलीसिया” शब्द, यूनानी शब्द “एक्लेसिया” से आता है. जिसका अर्थ “से बाहर बुलाया जाना” है। मसीही लोग संसार की व्यवस्था से बाहर बुलाए गए हैं कि वे “मसीह में” हो (1 कुरि 1:२)।
3. कलीसिया शब्द का अर्थ विश्वासियों का एक स्थानीय समूह हो सकता है (कुलु 4:15)।
4. इसका अर्थ विश्वव्यापी कलीसिया भी हो सकता है (1 कुरि 15:9)। यह शब्द हर जगह के सारे मसीहियों को सम्मिलित करता है।
5. दृश्य कलीसिया में वे सारे लोग हैं जिनके नाम स्थानीय कलीसिया की सूची में हैं, चाहे वे उद्धार पाए हों या नहीं। अदृश्य कलीसिया उनसे बनी है जिनके नाम मेमने की जीवन की पुस्तक में लिखे हैं (प्रका 21:२७)।
6. संघर्षशील कलीसिया का संकेत (पृथ्वी पर की सच्ची कलीसिया से है।
विजयी कलीसिया से कलीसिया के ऐसे भाग की ओर संकेत है जो पहले ही से स्वर्ग में है।
कलीसिया की स्थापना
1. कलीसिया यीशु मसीह के द्वारा, पतरस की इस स्वीकारोक्ति पर कि (यीशु परमेश्वर का पुत्र, मसीह था और है, स्थापित की गई थी (मत्ती 16:16-18)। हमारे उद्धारकर्त्ता ने कलीसिया की स्थापना पतरस पर नहीं परन्तु पतरस के शब्दों में घोषित किए गए सत्य पर की थी।
2. ऐतिहासिक रूप से, कलीसिया पिन्तेकुस्त के दिन स्थापित हुई जब पवित्र आत्मा उत्तरा (प्रेरितो के काम २)। प्रेरितों के काम 2:47; 1:13; 5:12;
2:46 और 12:12 देखिए।
चर्चा – कलीसिया शब्द के विभिन्न अर्थ क्या हैं?
कलीसिया में सदस्यता तथा कलीसिया का अभिप्राय
कलीसिया में सदस्यता की शर्तें
१. मन फिराव (प्रेरि २:३8)।
२. यीशु पर विश्वास कि वह उद्धारकर्त्ता, प्रभु तथा परमेश्वर का पुत्र है (मत्ती 16:16-18)।
३. उद्धार, पुनरुज्जीवन, नया जन्म (प्रेरि
४. त्रिएक परमेश्वर के नाम में बपतिस्मा (प्रेरि
५. प्रेरितों के सिद्धान्त में स्थिर रहना (प्रेरि २:42)।
कलीसिया का अभिप्राय
१. पृथ्वी पर मसीह की आराधना और महिमा करना (इफि 1:4-6)।
२. संसार में सुसमाचार का प्रचार करना (मत्ती २8:19,२०; मरकुस 16:15)।
३. मसीहियों को शिक्षा तथा निर्देश देना (इफि 4:11-15; 1 थिस्स
5:11; 1 कुरि 1२:1-३1)।
४. निरन्तर गवाही देना (प्रेरि 1:8)।
चर्चा – साधारणतः, कलीसिया की सदस्यता संबंधी कौन-सी गलतियाँ की जाती हैं?
कलीसिया के प्रतीक तथा कलीसिया की धर्मविधियाँ
१. कलीसिया के बाइबल पर आधारित प्रतीक
१. देह मसीह सिर है और हम उसकी देह के अंग हैं (कुल 1:18: 2:19; इफि १:२२-२३)।
२. परमेश्वर के आत्मा के लिए मन्दिर, इमारत या निवासस्थान मसीह कोने का प्रमुख पत्थर है और हम उस इमारत के विभिन्न भाग हैं (इफि २:२०,२1)।
३. मसीह की दुल्हन (२ कुरि 11:२)। मसीह दूल्हा है (यूहन्ना 3:२9)। प्रकाशितवाक्य 19:7,8 में विवाह का उल्लेख है।
२. कलीसिया की धर्मविधियाँ
दो धर्मविधियाँ हैं:
१. बपतिस्मा (मत्ती २8:19-२०; मरकुस 16:16; प्रेरि २:३8-41; 8:36-40; 10:47-48)।
२. प्रभु भोज (प्रेरि 2:42-46; 20:7; 1 कुरि 11:20-34)।
चर्चा – ऊपर दिए गए कलीसिया के प्रतीकों के अनुसार कलीसिया का सदस्य होने का अर्थ समझाइए।
